राजधानी स्थित प्रदेश के पॉलिटेक्निक कॉलेजों में पदस्थ आधे से ज्यादा लेक्चरर ऐसे हैं, जिन्हें अंतिम बार अप्रैल माह में वेतन मिला था। मई और जून का वेतन मिलने का उन्हें इंतजार है। प्रदेशभर के 69 सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज और 6 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों की यही स्थिति है। यहां पदस्थ 1200 से अधिक व्याख्याता सरकारी मुलाजिम होते हुए भी सालों से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की तरह मासिक वेतन के लिए 2 से 4 महीने तक इंतजार करते हैं। इसकी वजह सिर्फ इतनी है कि इन व्याख्याताओं को सोसायटी एक्ट के तहत 2004 के एक विवादित भर्ती नियम के कारण तकनीकी शिक्षा विभाग के अधीन न मानकर स्वशासी संस्था या जनभागीदारी समिति के अधीन रखा गया है।
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