Monday, 4 June 2018

खुद का घर टूटा लेकिन दूसरों का घर बना रही है ये महिला, अफसरों के घर काम किया और धीरे-धीरे बन गईं मिस्त्री

खंड़वा(एमपी)। गरीबी में पली-पढ़ी। शादी हुई, लेकिन पति का सुख नहीं मिला। रोज की लड़ाई में खुद का घर टूट गया। पति से अलग हो गई। अफसरों के घर काम किया। धीरे-धीरे मिस्त्री का काम सीखा। वक्त के साथ करनी, सूत और गोला उसके साथी बन गए। अब वह दूसरों का बनाकर बच्चों को पाल रही हैं। सब उन्हें फोरमेन (कारखाने में एक पद होता है) कहकर बुलाते हैं। नर्मदानगर की रहने वाली इस फोरमेन की संघर्ष की कहानी, उसी की जुबानी।

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