नर्मदा पुत्र अमृतलाल वेगड़। चित्रकार, शिक्षक, समाजसेवी साहित्यकार, पर्यावरणविद् सहित कई प्रतिभाओं के धनी रहे। साधारण पथिक के रूप में नर्मदा परिक्रमा शुरू की और धीरे-धीरे ‘नर्मदा पुत्र’ बन गए। वे कहते थे- ‘कोई वादक बजाने से पहले देर तक अपने साज के सुर मिलाता है, उसी प्रकार हम इस जनम में नर्मदा मैया के सुर मिलाते रहे, परिक्रमा तो अगले जनम में करेंगे’। उन्होंने नर्मदा परिक्रमा दो बार पूरी की। पहली बार 1977 में, जब वे 50 वर्ष के हुए थे और दूसरी बार 2002 में जब उन्होंने 75 साल पूरे किए थे। शुक्रवार सुबह 10:15 बजे उन्होंनेे जीवन की अंतिम परिक्रमा पूरी की। वेगड़ 90 साल के थे। अस्थमा से परेशान थे। कुछ माह पहले उनका प्रोस्टेट का ऑपरेशन भी हुआ था, पर हालत बिगड़ती गई। कुछ समय से वह वेंटीलेटर पर थे। शुक्रवार शाम 4 बजे नर्मदा किनारे ग्वारीघाट (जबलपुर) पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। वे अपने पीछे पत्नी कांता वेगड़ और पांच बेटे शरद, दिलीप, नीरज, अमित, राजीव वेगड़ को शोकाकुल छोड़ गए हैं।
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